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74) संस्कृत वाक्य अभ्यास

संस्कृत वाक्य अभ्यास
Sanskrit Sentence Study

संस्कृत वाक्य अभ्यास

मेरा क्या है ?
= मम किम् अस्ति ? 

मैं तो सामान्य व्यक्ति हूँ ।
= अहं तु सामान्यः जनः अस्मि ।

जो कुछ भी मिला है वो ईश्वर की देन है।
= यत्किमपि प्राप्तं तत् सर्वं ईश्वरस्य अनुकम्पा अस्ति 
 ( ईश्वरेण प्रदत्तम् ) 

सब यहीं छोड़कर जाना है ।
= सर्वम् अत्रैव त्यक्त्वा गन्तव्यम् अस्ति। 

अच्छा काम करूँगा तो अच्छा फल मिलेगा 
= श्रेष्ठं कार्यं करिष्यामि चेत् श्रेष्ठं फलं प्राप्स्यामि ।

संस्कृत वाक्य अभ्यासः  
~~~~~~~~~~~~~~ 

कस्य कस्य गृहे स्वच्छता भवति ? 
= किस किस के घर में स्वच्छता होती है ?  ( पुलिंग )

कस्याः कस्याः  गृहे स्वच्छता भवति ? 
= किस किस के घर में स्वच्छता होती है ?  ( स्त्रीलिंग ) 

मम गृहे स्वच्छता भवति ।
= मेरे घर में स्वच्छता होती है । 

मुकुन्दस्य गृहे स्वच्छता भवति ।
= मुकुन्द के घर में स्वच्छता होती है 

सुनीतायाः गृहे स्वच्छता भवति ।
= सुनीता के घर में सफाई होती है 

कः कः स्वच्छतां करोति ? 
= कौन कौन स्वच्छता करता है ?
( पुलिँग)

का का स्वच्छतां करोति ? 
= कौन कौन स्वच्छता करती है ?
( स्त्रीलिंग )

अहं स्वच्छतां करोमि ।
= मैं सफाई करता /करती हूँ ।

मुकुन्दः स्वच्छतां करोति ।
= मुकुन्द सफाई करता है ।

सुनीता स्वच्छतां करोति ।
= सुनीता सफाई करती है । 

सर्वे जनाः स्वच्छतां कुर्वन्तु ।
= सभी लोग सफाई करें ।

अस्माकम् आवास-परिसरे सर्वदा स्वच्छता भवेत् ।
= हमारे निवास विस्तार में हमेशा सफाई रहे ।

संस्कृत में " लट् , लिट् , लुट् , लृट् , लेट् , लोट् , लङ् , लिङ् , लुङ् , लृङ् " – ये दस लकार होते हैं।

•• वास्तव में ये दस प्रत्यय हैं जो धातुओं में जोड़े जाते हैं। इन दसों प्रत्ययों के प्रारम्भ में " ल " है

इसलिए इन्हें 'लकार' कहते हैं (ठीक वैसे ही जैसे ॐकार, अकार, इकार, उकार इत्यादि)।

•• इन दस लकारों में से 
~~~~ आरम्भ के छः लकारों के अन्त में 'ट्' है- 
लट् लिट् लुट् आदि इसलिए ये " टित् " लकार कहे जाते हैं और

~~~~ अन्त के चार लकार " ङित् " कहे जाते हैं क्योंकि उनके अन्त में 'ङ्' है।

•• व्याकरणशास्त्र में जब धातुओं से

पिबति, खादति आदि रूप सिद्ध किये जाते हैं

तब इन " टित् " और " ङित् " शब्दों का बहुत बार प्रयोग किया जाता है।

•• इन लकारों का प्रयोग विभिन्न कालों की क्रिया बताने के लिए किया जाता है।

जैसे –

••••• जब वर्तमान काल की क्रिया बतानी हो तो धातु से " लट् " लकार जोड़ देंगे,

•••••• परोक्ष भूतकाल की क्रिया बतानी हो तो " लिट् " लकार जोड़ेंगे।

(१) लट् लकार ( वर्तमान काल ) 
~~~~ जैसे :- 
श्यामः खेलति । = श्याम खेलता है।

(२) लिट् लकार ( अनद्यतन परोक्ष भूतकाल ) जो अपने साथ न घटित होकर किसी इतिहास का विषय हो । 
~~~~ जैसे :-- 
रामः रावणं ममार । = राम ने रावण को मारा ।

(३) लुट् लकार ( अनद्यतन भविष्यत् काल ) जो आज का दिन छोड़ कर आगे होने वाला हो । 
~~~~ जैसे :-- 
सः परश्वः विद्यालयं गन्ता । = वह परसों विद्यालय जायेगा ।

(४) लृट् लकार ( सामान्य भविष्य काल ) जो आने वाले किसी भी समय में होने वाला हो । 
~~~~ जैसे :--- 
रामः इदं कार्यं करिष्यति । = राम यह कार्य करेगा।

(५) लेट् लकार ( यह लकार केवल वेद में प्रयोग होता है, ईश्वर के लिए, क्योंकि वह किसी काल में बंधा नहीं है। )

(६) लोट् लकार ( ये लकार आज्ञा, अनुमति लेना, प्रशंसा करना, प्रार्थना आदि में प्रयोग होता है । ) 
~~~~ जैसे :- 
• भवान् गच्छतु । = आप जाइए । ;
• सः क्रीडतु । = वह खेले । ; 
• त्वं खाद । = तुम खाओ । ; 
• किमहं वदानि । = क्या मैं बोलूँ ?

(७) लङ् लकार ( अनद्यतन भूत काल ) आज का दिन छोड़ कर किसी अन्य दिन जो हुआ हो । 
~~~~ जैसे :- 
भवान् तस्मिन् दिने भोजनमपचत् । = आपने उस दिन भोजन पकाया था।

(८) लिङ् लकार = इसमें दो प्रकार के लकार होते हैं :--

(क) आशीर्लिङ् ( किसी को आशीर्वाद देना हो । ) 
~~~~ जैसे :- 
• भवान् जीव्यात् । = आप जीओ । ; 
• त्वं सुखी भूयात् । = तुम सुखी रहो।

(ख) विधिलिङ् ( किसी को विधि बतानी हो ।)
~~~~ जैसे :- 
• भवान् पठेत् । = आपको पढ़ना चाहिए। ; 
• अहं गच्छेयम् । = मुझे जाना चाहिए।

(९) लुङ् लकार ( सामान्य भूत काल ) जो कभी भी बीत चुका हो । 
~~~~ जैसे :- 
अहं भोजनम् अभक्षत् । = मैंने खाना खाया।

(१०) लृङ् लकार ( ऐसा भूत काल जिसका प्रभाव वर्तमान तक हो) जब किसी क्रिया की असिद्धि हो गई हो । 
~~~~ जैसे :- 
यदि त्वम् अपठिष्यत् तर्हि विद्वान् भवितुम् अर्हिष्यत् । = यदि तू पढ़ता तो विद्वान् बनता।

इस बात को स्मरण रखने के लिए कि 
•••• धातु से कब किस लकार को जोड़ेंगे, निम्नलिखित श्लोक स्मरण कर लीजिए-

लट् वर्तमाने लेट् वेदे भूते लुङ् लङ् लिटस्‍तथा ।

विध्‍याशिषोर्लिङ् लोटौ च लुट् लृट् लृङ् च भविष्‍यति ॥

अर्थात्

~ लट् लकार वर्तमान काल में,

~ लेट् लकार केवल वेद में,

~ भूतकाल में लुङ् लङ् और लिट्,

~ विधि और आशीर्वाद में लिङ् और लोट् लकार तथा

~ भविष्यत् काल में लुट् लृट् और लृङ् लकारों का प्रयोग किया जाता है।)

******************************
लकारों के नाम याद रखने की विधि-
******************************
" ल् " में प्रत्याहार के क्रम से ( अ इ उ ऋ ए ओ ) जोड़ दें

और क्रमानुसार ( ट् ) जोड़ते जाऐं ।

फिर बाद में ( ङ् ) जोड़ते जाऐं जब तक कि दश लकार पूरे न हो जाएँ ।

जैसे

•• लट् लिट् लुट् लृट् लेट् लोट्

•• लङ् लिङ् लुङ् लृङ् ॥

इनमें लेट् लकार केवल वेद में प्रयुक्त होता है । लोक के लिए नौ लकार शेष रहे ।

अब इन नौ लकारों में लिङ् के दो भेद होते हैं :-- 
आशीर्लिङ् और विधिलिङ् ।

इस प्रकार लोक में दश के दश लकार हो गए ।

विशाखा स्वर्णकारस्य आपणं गच्छति। 
= विशाखा सुनार की दुकान जाती है। 

विशाखा सख्या सह गच्छति।
= विशाखा सखी के साथ जाती है। 

सा कर्णपुष्पम् इच्छति।
= वो कान के टॉप चाहती है। 

स्वर्णकारः अनेकविधानि कर्णपुष्पाणि दर्शयति। 
= सुनार अनेक प्रकार के कान के टॉप दिखाता है। 

सा प्रदर्शनमंजूषायां कर्णलोलकं पश्यति।
= वह शोकेस में कान का झुमका देखती है। 

सा वदति - "कृपया कर्णलोलकं दर्शयतु।"
= वह बोलती - कृपया कान के झुमके दिखाईये। 

स्वर्णकारः अनेकविधानि कर्णलोलकानि दर्शयति। 
= सुनार अनेक प्रकार के  कान के झुमके दिखाता है। 

विशाखा स्वर्णस्य शुद्धताविषये पृच्छति। 
= विशाखा सोने की शुद्धता के बारे में पूछती है। 

स्वर्णकारः वदति "मम आपणे शुद्धमेव स्वर्णं मिलति।" 
= सुनार बोलता है "मेरी दूकान में शुद्ध ही सोना मिलता है"  

चतुर्विंशतिः पदं शुद्धं स्वर्णम् ।
= चौबीस कैरेट शुद्ध सोना। 

विशाखा स्वकर्णे कर्णलोलकं स्थापयति।
= विशाखा अपने कान पर झुमका लगाती है। 

सा दर्पणे मुखं पश्यति।
= वह दर्पण में अपना चेहरा देखती है। 

विशाखायाः सखी वदति " बहु शोभते" 
= विशाखा की सखी बोलती है " बहुत अच्छा लग रहा है" 

"क्रीणातु " 
= खरीद लीजिये। 

विशाखा कर्णलोलकं क्रीणाति। 
= विशाखा कान का झुमका खरीदती है।

संस्कृत वाक्य अभ्यासः  
~~~~~~~~~~~~~~ 

वयं सर्वे 
= हम सब ( हम सभी ) 

अधुना वयं सर्वे किं कुर्मः ? 
= अभी हम सब क्या कर रहे हैं ? 

वयं सर्वे ध्यानं कुर्मः ।
= हम सभी ध्यान कर रहे हैं ।

वयं सर्वे यज्ञम् कुर्मः ।
= हम सभी यज्ञ कर रहे हैं ।

वयं सर्वे पठामः ।
= हम सभी पढ़ रहे हैं ।

वयं सर्वे लिखामः ।
= हम सभी लिख रहे हैं ।

वयं सर्वे खादामः ।
= हम सभी खा रहे हैं ।

वयं सर्वे पिबामः ।
= हम सब पी रहे हैं । 

वयं सर्वे हसामः ।
= हम सभी हँस रहे हैं ।

वयं सर्वे गच्छामः ।
= हम सब जा रहे हैं ।

पहले सोचता हूँ फिर बोलता हूँ ।
= पूर्वं चिन्तयामि अनन्तरं वदामि ।

पहले सोचता हूँ फिर लिखता  हूँ ।
= पूर्वं चिन्तयामि अनन्तरं लिखामि । 

बिना सोचे कुछ नहीं बोलता हूँ ।
= अविचार्य किमपि न वदामि ।

बिना सोचे कुछ नहीं लिखता हूँ ।
= अविचार्य किमपि न लिखामि । 

सत्य और प्रिय बोलने का प्रयत्न करता हूँ ।
= सत्यं,प्रियं च वक्तुं प्रयत्नं करोमि।

बिना सोचे कभी नहीं बोलना चाहिये 
= अविचार्य कदापि न वक्तव्यम् 

आपका सबका दिन मङ्गलमय हो ।
= भवतां सर्वेषां दिनं मङ्गलमयं भवेत् ।
संस्कृत वाक्य अभ्यासः  
~~~~~~~~~~~~~~ 

वरुणः - सोपानेन उपरि चलाम 
          = सीढ़ी से ऊपर चलें । 

तेजसः - सोपानेन !! एकादशमे तले !!       
          = सीढ़ी से !!  ग्यारहवीं मंजिल पर !! 

तेजसः - उत्कर्षिणी अस्ति भो: ! 
          = लिफ्ट है न 

वरुणः - उत्कर्षिणीम् त्यज ।
          = लिफ्ट को छोड़ो ।

वरुणः  - आवां शीघ्रं शीघ्रम् आरोहावः ।
          = हम दोनों जल्दी जल्दी चढ़ते हैं । 

तेजसः - तर्हि उरुक्रमेण आरोहणीयम् 
          = तो फिर बड़े बड़े कदमों से चढ़ना होगा । 

वरुणः - आम् , तथैव ।
          = हाँ , वैसे ही ।

वरुणः - अद्य आवां व्यायामं न कृतवन्तौ ।
         = आज हम दोनों ने व्यायाम नहीं किया ।

वरुणः - अतः सोपानेन एव आरोहावः ।
        = इसलिये सीढ़ी से ही चढ़ते हैं । 

तेजसः - कार्यालयात् पादाभ्याम् आगतवन्तौ 
         = कार्यालय से हम दोनों पैदल आए 

तेजसः - अधुना सोपानेन आरोहावः ... उफ् .... 
         = अब सीढ़ी से चढ़ रहे हैं .... उफ् ....

तस्य अपि गृहात् बहिः अस्वच्छता अस्ति। 
= उसके भी घर के बाहर अस्वच्छता है ।

अद्य सः स्वच्छतां करोति। 
= आज वह स्वच्छता कर रहा है 

हस्ते मार्जनीं स्वीकृत्य स्वच्छतां करोति। 
= हाथ में झाड़ू लेकर सफाई कर रहा है। 

वस्त्रेण भित्तिं स्वच्छां करोति। 
= कपड़े से दीवाल साफ कर रहा है 

अङ्गणे बहूनि पर्णानि सन्ति। 
= आँगन में बहुत से पत्ते हैं 

सः पर्णानि एकस्मिन् भाण्डे पूरयति।
= वह पत्तों के एक डिब्बे में भरता है। 

दूरं गत्वा सः क्षिप्स्यति। 
= दूर जाकर फेंक देगा। 

वातायनानि अपि मालिनानि सन्ति।
= खिड़कियाँ भी मैली हैं। 

सः वातायनानि स्वच्छानि करोति।
= वह खिड़कियाँ साफ कर रहा है। 

कार्यं समाप्य सः स्नानं करिष्यति। 
= काम समाप्त करके वह नहाएगा। 

अनन्तरं कार्यालयं गमिष्यति। 
= बाद में ऑफिस जाएगा।

प्रतिदिनं सः माम् अंजारनगरे मिलति ।
= हररोज वह मुझे अंजार में मिलता है 

सः मह्यं धनं ददाति ।
= वह मुझे पैसे देता है । 

अहं तस्मात् धनं स्वीकरोमि। 
= मैं उससे धन लेता हूँ ।

तद् धनं मम कार्यालयस्य कृते भवति ।
= वो धन मेरे ऑफिस के लिये होता है ।

कार्यालायं गत्वा अहं धनं समर्पयामि ।
= कार्यालय जाकर मैं धन जमा करा देता हूँ 

तस्य प्राप्तिपत्रं सायंकाले तस्मै ददामि।
= उसकी रसीद शाम को उसे देता हूँ 

सः प्रतिदिनं मम प्रतीक्षां करोति। 
= वह हररोज मेरी प्रतीक्षा करता है


माता पात्राणि प्रक्षालयति। 
= माँ बर्तन धोती है। 

चतुर्वर्षीया पुत्री पात्राणि वस्त्रेण प्रौञ्छति। 
= चार वर्ष की बेटी बर्तनों को कपड़े से पोंछती है। 

चमसं प्रौञ्छति = चम्मच पोंछती है। 
( चमसान् प्रौञ्छति = बहुत से चम्मच पोंछती है)

चषकं प्रौञ्छति = गिलास पोंछती है। 
( चषकान् प्रौञ्छति = बहुत से गिलास पोंछती है) 

स्थालिकां प्रौञ्छति = थाली पोंछती है। 
( स्थालिकाः प्रौञ्छति = बहुत सी थालियाँ पोंछती है) 

एका स्थालिका दीर्घा आसीत्। 
= एक थाली बड़ी थी। 

स्थालिका गुरुः अपि आसीत्। 
= थाली भारी भी थी। 

बालिकायाः हस्तात् स्थालिका पतिता। 
= बच्ची के हाथ से थाली गिर गई। 

बालिका - ओ.. स्थालिका पतिता। 
            = ओ ... थाली गिर गई। 

माता - त्वं त्यज .. अहं प्रौन्क्ष्यामि। 
       = तुम छोड़ दो ..  मैं पोंछ दूँगी। 

बालिका - नैव अम्ब ! भवती कियत् कार्यं करिष्यति !!! 
            = नहीं माँ ! आप कितना काम करेंगी। 

सा बालिका प्रतिदिनं मातुः साहाय्यं करोति। 
= वह बच्ची प्रतिदिन माँ की सहायता करती है। 

भवती / भवान् अपि करोति वा ? 
= आप भी करते हैं क्या ?
संस्कृत वाक्य अभ्यासः  
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सः ईश्वरः अस्ति ।
= वह ईश्वर है ।

सः जगदीश्वरः अस्ति ।
= वह जगदीश्वर है ।

सः परमेश्वरः अस्ति ।
= वह परमेश्वर है ।

तस्य अनेकानि नामानि सन्ति।
= उसके अनेक नाम हैं ।

सः सर्वेषां शिवं करोति ।
= वह सबका शुभ करता है । 

अतः तस्य नाम शिवः अस्ति ।
= इसलिये उसका नाम शिव है ।

शिवः अनादि अस्ति ।
= शिव अनादि है ।

शिवः अनन्तः अस्ति ।
= शिव अनन्त है । 

अद्य शिवरात्रि: अस्ति ।
= आज शिवरात्रि है ।

अद्य बोधरात्रि: अस्ति ।
= आज बोधरात्रि है ।

सर्वेभ्यः शिवरात्रे: पर्वणः शिवकामनाः 
= सबको शिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएँ ।


प्रातः चतुर्वादने कन्यायाः आप्रच्छनं भवति 
= सुबह चार बजे कन्या की बिदाई होती है। 

कन्या बहु रोदिति। 
= कन्या बहुत रोती है ।

कन्यायाः माता अपि रोदिति।
= कन्या की माँ भी रोती है 

कन्यायाः पिता अपि रोदिति।
= कन्या का पिता भी रोता है। 

कन्या मातरम् आलिङ्गति ।
= कन्या माँ को गले लगती है। 

कन्या पितरम् आलिङ्गति ।
= कन्या पिता को गले लगती है। 

कन्यायाः मातृस्वसा अश्रूणि प्रवाहयति।
= कन्या की मौसी आँसू बहाती है। 

मतुलः एकस्मिन् कोणे स्थित्वा रोदिति।
= मामा एक कोने में खड़ा होकर रोता है 

भ्राता भगिन्याः अश्रूणि प्रौञ्छति। 
= भाई बहन के आँसू पोंछता है। 

भ्राता अपि रोदिति। 
= भाई भी रोता है। 

कन्यायाः आप्रच्छन समये सर्वे रुदन्ति ।
= कन्या की बिदाई के समय सब रोते हैं।


अहं तं पश्यामि ।
= मैं उसको देख रहा हूँ ।

अहं तं श्रमिकं पश्यामि ।
= मैं उस मजदूर को देख रहा हूँ। 

श्रमिकः भूमिं खनत्ति ।
= मजदूर जमीन खोद रहा है ।

सः तीक्ष्णेन कुदालेन प्रहारं करोति 
= वह तीखे कुदाल से प्रहार करता है। 

सः बलेन प्रहारं करोति। 
= वह बलपूर्वक प्रहार करता है । 

तस्य भार्या गर्तात् मृत्तिकां निष्कासयति । 
= उसकी पत्नी गड्ढे से मिट्टी निकालती है । 

मध्याह्ने तौ द्वौ वृक्षस्य अधः उपविशतः ।
= दोपहर को वो दोनों वृक्ष के नीचे बैठते हैं ।

द्वौ एकसाकं भोजनं कुरुतः ।
= दोनों एक साथ भोजन करते हैं ।


एका मूषिका गृहस्य अन्तः प्रविष्टा 
= एक चुहिया घर के अंदर घुसी है। 

सा इतस्ततः धावति। 
= वह यहाँ से वहाँ दौड़ती है। 

बहु वेगेन धावति। 
= बहुत तेज दौड़ती है। 

अधुनैव कपाटिकायाः पृष्ठे आसीत्। 
= अभी अभी कपाट के पीछे थी। 

शीघ्रमेव सा पर्यंकस्य अधः गता। 
= जल्दी से वो पलँग के नीचे चली गई। 

ओह ... अधुना सा उत्पीठिकायाः उपरि अस्ति। 
= ओह ... अभी वो टेबल के ऊपर है। 

कथं गृह्णानि ? 
= कैसे पकड़ूँ ? 

सा मूषिका मम पुस्तकानि खादिष्यति।
= वो चुहिया मेरी पुस्तकें खा जाएगी। 

बिडाली तत्र भ्रमति। 
= बिल्ली वहाँ घूम रही है। 

कथं बिडालीम् आनयानि ? 
= बिल्ली को कैसे लाऊँ ? 

तां हस्तेन गृह्णामि। 
= उसको हाथ से पकड़ता हूँ। 

सा तु गृहपशुः भवति। 
= वो तो पालतू होती है। 

बिडाली आगता .... 
= बिल्ली आ गई ....

-- अखिलेश आचार्य

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